गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
Thursday, September 8, 2011
Wednesday, September 7, 2011
Sunday, September 4, 2011
Tuesday, August 30, 2011
"जिन्दगी"
एक नज्म
रह गयी है मेरी
रह गयी है मेरी
तुम्हारे पास
गलती से ..
गलती से ..
जिसका नाम अनजाने में
"जिन्दगी"
रख दिया था मैंने
रख दिया था मैंने
मायने मालूम नहीं थे ना
इसलिए छूट गयी
शायद तुम्हारे पास !
शायद तुम्हारे पास !
मायने समझ आएँ हैं तो
अक्ल भी आ गयी है
अब नहीं दोहराउंगी
जीवन कि उन तहरीरों को
और अगर लिखूंगी भी
तो किसी को सौंपने कि
भूल तो हरगिज़ नहीं करूंगी
क्योकि गलतियां
दोहराने पर जिन्दगी
पछताने का भी मौका नहीं देती
- वंदना
Saturday, August 27, 2011
ग़ज़ल --हम रीत पुरानी हो जाएँ
बूँद बूँद में घुलकर हम भी बहता पानी हो जाएँ..
जिन्दगी को लिखते लिखते एक कहानी हो जाएँ !
अल्फाज़ दिये मैंने अपनी धड़कन कि तहरीरों को..
तुम लबो से छू लो तो ये ग़ज़ल सुहानी हो जाएँ !
मेरी आँखों के दर्पण में खुद को सवाँरा कीजिये..
इन शर्मीली सी आँखों का हम भी पानी हो जाएँ !
मुझको साँसे बख्श दो मैं धड़कन तेरी हो जाऊं..
तुम जो ये सौदा करलो जीने कि असानी हो जाएँ !
तुम राधा कि दीवानगी मैं हूँ मुरली कि तान..
अपनाकर इस प्रीत को हम रीत पुरानी हो जाएँ !!
अपनाकर इस प्रीत को हम रीत पुरानी हो जाएँ !!
वंदना
Friday, August 26, 2011
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सोचती हूँ इस फ़साने का अब कोई अदम लिख दूं क़त्ल ए किरदार से पहले एक आखरी नज्म लिख दूं .... जिंदगी नयी शर्तों पर फिर जीने के मोहलत ले आय...






