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शायद आसान था पर लगा मुश्किल ,
खुद को खुद में खोना...
वक्त सिखलाता है हर लम्हा
जिन्दगी को जिन्दगी होना...
अभिलाषाए देती है हर ठोकर से
आगे चलने का मशवरा ,
ख्वाइशे आसान है मगर
मुश्किल है किसी उम्मीद को खुद में बोना.
गीत, ग़ज़ल, नज्म ..ये सब मेरी साँसों कि डोर, महंगा पड़ेगा बज्म को मेरी खामोशियों का शोर ! --- "वन्दना"
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तुम्हे जिस सच का दावा है वो झूठा सच भी आधा है तुम ये मान क्यूँ नहीं लेती जो अनगढ़ी सी तहरीरें हैं कोरे मन पर महज़ लकीर...