Thursday, September 26, 2013

मीठा हो जाता है हर दर्द गुनगुनाने से



दिल मुझसे पूछता है ये  बात हर बहाने से
क्या जिंदगी  होगी  आसां तुझे भुलाने से  ?

मुख़्तसर सा असर हो तो दिलासा भी दूँ
मर्ज घटता नही किसी का, जहर खाने से

है मुनासिब हम इसको खुदखुशी ही कहें
गुनाह कम नही होगा  इलज़ाम लगाने से

गुजरे लम्हों कि  तस्वीर निखर जाती है
दिल के दरिया में बस  इक उछाल आने से


 सोचते  हि तुझे घटाओ में दिए जल उठे 
जाने बारिशों पे क्या गुजरती तेरे आने से 


ये तजुर्बा भी शायरी ने दिया है हमको
मीठा हो जाता है  हर दर्द गुनगुनाने से



- वंदना 








Saturday, September 21, 2013

इश्क





 खालीपन से भरी
वो जब तनहा 
दिल के किसी 
कोने में सिमटकर 
बैठती है 

तलाशती है  खुद में 
एक बाँवरे पन को 
वही जो किसी के 
होने तक साथ था 


खोजती है उस इश्क को
जो उसके बाँवरे पन ने 
आखरी सी साँसों में 
जिया था  शायद ...

ढूंढती हूँ  उसे 
जहन में लगी
वक्त कि तस्वीरों  में

मगर
इश्क रूप नही है
इश्क सूरत नही है
इश्क मूरत नही है 
इश्क काम नही है
इश्क आँखे नही हैं
इश्क  आवाज़ नही है




काश  ऐसा होता
तो मन कि तृप्ति
सरलतम  हो सकती थी
और जिंदगी बहुत आसान

जो ठहरे तो दरिया है 
उड़े तो जैसे  बादल 

बरसे तो सावन है
कभी आँख का बहता काजल 

बूँद बूँद किसी प्यास में बँटता
दिल की झील का पानी है। 

एक समंदर खुद में लेकर
बहती नदिया की रवानी है 

जिंदगी के साज़ पे नाचती 
रूह कि टीस पुरानी है  !

आखों में पलकर जवां होती 
इश्क एक  मौन कहानी है




- वंदना







Sunday, September 1, 2013

मत चींखो मत लड़ो दामिनी


मत चींखो मत लड़ो दामिनी यहाँ ओरत होना सस्ता है
अन्धो कि चोपट नगरी में इन्साफ नही हो सकता है

तुम मर गयीं, मरती रहोगी, हर गली चौराहे पर

यह देश इस मातम को  रोज़ रोज़ कर सकता है

कौन देखे धब्बे अस्मिता के कानून जहाँ का अंधा है
जुर्म से कैसे लड़ पायेगा वो तो लाचार निहत्ता है

खिश्याया सा पूरा देश ,देखो  खुद पर हँसता है
यहाँ आसाराम जैसा भी "धर्म गुरु " हो सकता है

तुमको क्या मालूम कलयुग के धृतराष्ट्रों कि लाचारी
इस जुर्म को लेकर कैसे कोई महाभारत हो सकता है

बिगुल बजाकर हम तो देखेंगे कैसे आँचल जलता है
तुम्हारे श्राप से कौन दामिनी यहाँ कैसे कैसे गलता है
- वंदना
08/31/2013 

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...