Saturday, December 31, 2011

ले गया है बहुत कुछ ये साल जाते जाते ..




इस दौर को कर गया निढाल जाते जाते
ले गया है बहुत कुछ ये साल जाते जाते ..

शक्लें दीं थी जिन्होंने इस नए ज़माने को
तोड़ गया वो आईने ,ये काल जाते जाते..

तरन्नुम का हमसे जिसने तार्रुफ़ कराया था
उदास छोड़ गया ग़ज़लें ,वो बेमिशाल जाते जाते.
 

सच जिंदगी उम्र कि हर बंदिश से आगे है
ख़त्म हुई  कैसे ये कदमताल जाते जाते..
  
 दिखाए थे   नए आकाश  मेरी उड़ानों को
वक्त फेंक गया कैसा ये  जाल जाते जाते..

- वंदना

Friday, December 9, 2011

शाम

सिमटती शफक कि लालिमा ..


एक तरफ बिखरती हुई चांदनी....


एक तरफ उतरता हुआ सूरज 


एक तरफ चढ़ता हुआ चन्द्रम़ा ..


ये शाम बस यूँ ही ठहरी रहे मोला 


आज अंधियारे को तू बेपनाह कर दे!!






- वंदना 

Saturday, December 3, 2011

त्रिवेणी





कभी आँचल ले उडी तो  कभी  चुभती हुई धूल 
कभी खुशबुएँ चुरा लाइ , कभी गयी संदेशे भूल 

इस पुरवाई को क्यूं ..अदब सिखाए नही जाते !!

- वंदना 

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...