Wednesday, March 31, 2010

ek chhoti si gajal ...







वो छोड़ गया मुझको ..अजब लहरों के बवंडर में
के ना तो डूब ही पाए, ...उभरना हो गया मुश्किल..

गजब का नूर था उसकी उन शतिर निगाहों में
के नादाँ था ये दिल मेरा ..संभलना हो गया मुश्किल..

वो नजरो से कर बैठा कुछ सवालात मुश्क्किल से
ना हम कुछ कह ही पाए, ...मुकरना हो गया मुश्किल..

आईना हँसता है जाने किस जुदा अंदाज से मुझपर
क्या बताये आजकल क्यूं ..संवरना हो गया मुश्किल ..


मेरा मुजरिम है उसको   खबर देना मेरे दोस्तों 
दिया है जख्म एक ऐसा के भरना हो गया मुश्किल.. 


ये बेपत्वार सी जिन्दगी हमें मंजूर कब से थी.
मगर अपना लिया इसको तो मरना हो गया मुश्किल ...

Saturday, March 27, 2010



गुनगुनाती है जिसे हर लम्हा ख़ामोशी मेरी ..
वो ऐसा ....बेजुबां .....साज दे गया

जिधर नजर उठाई ..फ़साने बन गए
मेरे मूक एहसासों को अल्फाज दे गया

शोर ..मचाने लगी हैं ...धड़कने मेरी ,
वो दिल का जाने इन्हें कोंन सा राज दे गया..

आईने को... भला ..ये कौन समझाये,
कौन आँखों को हया के नए अंदाज दे गया...

मुझे ...डराने लगा है हर घडी खोफ कोई ,
वो जिन्दगी को कैसे ये आगाज दे गया..

** सहम जाती है ..रूह मेरी... ये सोचकर,
वो क्यूं एक झूठा ख्याल ए परवाज दे गया..

मुझे उस राह जाना नहीं ,उसे इस डगर आना नहीं,
फिर क्यूं .....वो बेवजह .... मुझे आवाज दे गया.... .


vandana

Thursday, March 25, 2010

चंद आशार





इतनी संजीदगी से चोट खाता किनारा नहीं देखा जाता

जाने क्यूं हमसे तड़पती लहरों का नजारा नहीं देखा जाता ..

जुर्म हवाओं का नहीं ....मोसम ए पतझड़ का है
मगर झरझर होता साख ए गुल बेचारा नहीं देखा जाता

एक रोज लाये थे तुम शहद सी मिठास जिन्दगी में मेरी
मगर यूँ अब बदलता मिजाज तुम्हारा नहीं देखा जाता ...

जी तो करता है के कोई दुआ आज मैं भी मांग लूं
मगर मुझसे टूटकर गिरता वो तारा नहीं देखा जाता ..

यकीं मानो खुद को इतना मजबूर कभी नहीं पाया हमने
ये क्या हुआ है के हाल हमसे हमारा नहीं देखा जाता..

कोई बताये इस दिल को मैं किन सलाखों से कैद करूँ
रुसवा होती है सख्सियत मेरी ..मुझसे यह यूँ आवारा नहीं देखा जाता....

Thursday, March 18, 2010

सांझ



एक ठिठुरती सांझ को


सागर के तट पर तपते देखा है ..


समंदर कि रूह को ..तपिश से..


पिघलते देखा है,


मंजर आसमां का


धुंआ धुंआ सा है ...


मैंने एक चिराग कि लो में


बादलो को जलते देखा है !!

Monday, March 8, 2010

gajal



मेरी आँखे... उबलती ...नहर सी है
तेरी यादे. . कसम से ..कहर सी है

दर्दे दिल को सहलाता है तस्सवुर तुम्हारा
अजीब दवा है .....जो . .जहर सी है

इज्तराब ए इश्क क्या चीज़ है मालूम नहीं
मगर एक बेचैनी हमें आठो पहर सी है

खुद में सिमटकर रहना फिदरत है हमारी
फिर क्यूं हालत अपनी तड़पती लहर सी है

हर लम्हा. .एक उम्र सी जीता है मेरा
हर पल कि तड़प ..बेमहर सी है..

Wednesday, March 3, 2010

त्रिवेणी


बिखरती साँसे ,छटपटाती रूह,इज्तराब ए रफ़्तार में बेइख्तियार दोड़ती धड़कने ..


तेरे तसव्वुर को सुलझाने में........हम खुद से उलझ बैठे है,,


शायद आज फिर एक गिरह नज्म बनके कागज पर उगेगी.

गीत

नयन हँसें और दर्पण रोए  देख सखी वीराने में  पागलपन अब हार गया खुद को कुछ समझाने में  -- काली घटायें  घुट घुट जाएँ  खार...